चला जाता हूँ हँसता-खेलता मौजे-हवादिस से, अगर आसानियाँ हों ज़िंदगी दुशवार हो जाए।

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Tuesday, January 17, 2012

दस्तक : नये साल की

अपने दरवाज़े पे फिर वक्त ने दी है दस्तक। फिर नया साल नये ख़्वाब सजा लाया है।



اپنے دروازے پے پھر وقت نے دی ہے دستک . پھر نیا سال نے خواب سجا لیا ہے

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