चला जाता हूँ हँसता-खेलता मौजे-हवादिस से, अगर आसानियाँ हों ज़िंदगी दुशवार हो जाए।

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Wednesday, January 25, 2012

26 जनवरी, 2012 पर

धुन्ध अगर गहरा है, तो क्या ?
अन्तहीन सहरा है, तो क्या ?
क़दम कद़म पहरा है, तो क्या ?
सिंहासन बहरा है, तो क्या ?
मन-मूरख को मुसकाने का मन्त्र मुबारक हो।.
अटल छत्र की छाया में गनतन्त्र मुबारक हो।।

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